Thursday, December 4, 2014

बौद्धिक विकास और हार्दिक विकास

प्रसिध्द भौतिक शास्त्रज्ञ स्टीफन हॉकिन्स ने एक साक्षात्कारमे बताया है की आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स पूरी मानवजाती को बहोता ही बड़ा खतरा बन सकता है। आगे जाकर उन्होंने यह भी बताया है की आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स पूरी मानवजाती को नष्ट भी कर सकता है। 
वास्तविक रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स( AI ) यह मानव का ही एक नवीनतम और असाधारण अविष्कारण है। शास्त्रज्ञ्योंने ही यंत्र को विचारशक्ति,पृथ:करणशक्ति प्रदान की है। और यह शक्ति बहोत ही प्रचंड है जिसका सामान्य आदमी चिंतन भी नहीं करा। कींतु यहआविष्करण भस्मासुर की तरह पूरी मनव जाती को खतरा बनने जा रहा है।
अब यह समय चुका है की हमें इसके उपर विचारमंथन करके इस भस्मासुर का प्रतिरोध करना चाहिए।
यह ऐसा क्यों हो सकता ? इस सदी में सभी लोग बौद्धिक और भौतिक विकास के पीछे भाग रहे है। बहोत ही कम लोग भावनिक, हार्दिक विकास के बारेमें सोचते है। बौद्धिक और भौतिक विकास मानवमात्र के लिए अवश्यम्भावी है , लेकिन बौद्धिक और भौतिक विकास काफ़ी नहीं नहीं है , उसके साथ भावनिक , हार्दिक विकास भी जरूरी है। बौद्धिक विकास और हार्दिक विकासमे जो अंतर है वो बताने के लिए एक एक उदाहरण देता हूँ। एक एक बार एक आदमीने उसकी नई गाड़ी फ्री सरवीसिंग हेतु गाड़ी के शोरूम में दे दी , फ्री सरवीसिंग के बाद उसके दोस्त ने पूछा -- फ्री सरवीसिंग के बाद आपकी गाड़ी कैसी चल रही है ? उसने बताया पहलेही अच्छी चलती थी। उन्होंने शोध किया तो पता चला की फ्री सरवीसिंग के समय नए पार्ट निकालके पुराने पार्ट गाड़ीमे बिठाए गए है। पार्ट निकालना उन्हें बिठाना यह हुआ बौद्धिक विकास। और उसी गाड़ी के पार्ट उसी गाड़ी को बिठाना यह हुअा हार्दिक विकास।
यदि मानव बौद्धिक और हार्दिक दोनों ही दृष्टीसे विकसित हुआ तो यह खतरा टल सकता है।

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