आज कल स्वर्गीय नाथूरामजी की देशभक्ती के बारे में संसद से लेकर चौराहे तक चर्चाए चल रहीं है। उन्होंने स्वर्गीय महात्मा गांधी जी की ह्त्या की वो संविधान के तहत गलत थी या बराबर थी इसका फ़ैसला न्यायपालीका कर चुकीं है और तदनुषंगिका सजा स्वर्गीय नाथूरामजी भुगत भी चुकें है । महात्माजी का भारतवर्ष के लीजो योगदान दिया है वो भी अनन्यसाधारण हैं। उस समय पाकिस्तान को रक्कम जो अदा करनी थीं उसके बारेमे उनका जो आग्रह था वो नैतिकता के अनुसार सही भी था, लेकिन राजनैतिक दृष्टीसे, मातृभूमी कीभक्ती दृष्टिसे वह गलत लगता है। क्यों की वचन परिपूर्तीकी उत्तरदायीता दोनोंही पक्षों पर होती है। जब भारत पाक विभाजन हुआ उस समय पाकिस्तानमें जो हिंदुओंका कत्ले आम हुआ उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। और ऐसी पारिस्थितिके बावजूद भारत ने वचनपरीपूर्ती कराना गलत या बराबर था इसका उत्तर कोई भी दे सकता।
नाथूरामजी की और महात्माजिकी कोई निजी दुश्मनी नही थी , इतनाही ही नहीं तो ऐसा बतलाया जाता है की ह्त्या करनेके पहले नाथूरामजी ने महात्माजी को नमन दर्शन किया था। जो महात्माीजीका पाकिस्तान को रकम अदा करने हेतु जो आग्रह था उसी कारण वाश नाथूरामजीने महात्माजी की ह्त्या का निर्णय लिया था , ऐसा नाथूरामजी ने स्वयं न्यायपालीके के सामने बतलाया है। इन सब बातों का अंतर्मुखता से विचार किया तो ह्त्या करना वैधानिक ,न्यायिक दृष्टीसे अवश्य गलत था लेकिन उसका उद्देश्य motive भारत वर्ष के अच्छे के लिय था ऐसा लगता है। और हत्या के पहलेका उनके चरित्र का विचार किया जाए तो उनका संपूर्ण जीवन देसभक्ती से प्रेरित था। जब कोई कहता है की नाथूरामजी को देशभक्त कहना गलत है तब इन सभी बातो का विचार करना आवश्यम्भावी है। उन्होंने की हुई महात्माजी की ह्त्या और उनकी देसभक्ति इन दोनों बातों को अलग अलग सोचना चाहिए ऐसा मुझे लगता है। मै महात्मा गांधी ह्त्या का समर्थ नहीं करता हूँ। लेकिन नाथूरामजी के देशभक्ती के उपर आक्षेप लेना ये भी सही नहीं मानता हूँ।
नाथूरामजी की और महात्माजिकी कोई निजी दुश्मनी नही थी , इतनाही ही नहीं तो ऐसा बतलाया जाता है की ह्त्या करनेके पहले नाथूरामजी ने महात्माजी को नमन दर्शन किया था। जो महात्माीजीका पाकिस्तान को रकम अदा करने हेतु जो आग्रह था उसी कारण वाश नाथूरामजीने महात्माजी की ह्त्या का निर्णय लिया था , ऐसा नाथूरामजी ने स्वयं न्यायपालीके के सामने बतलाया है। इन सब बातों का अंतर्मुखता से विचार किया तो ह्त्या करना वैधानिक ,न्यायिक दृष्टीसे अवश्य गलत था लेकिन उसका उद्देश्य motive भारत वर्ष के अच्छे के लिय था ऐसा लगता है। और हत्या के पहलेका उनके चरित्र का विचार किया जाए तो उनका संपूर्ण जीवन देसभक्ती से प्रेरित था। जब कोई कहता है की नाथूरामजी को देशभक्त कहना गलत है तब इन सभी बातो का विचार करना आवश्यम्भावी है। उन्होंने की हुई महात्माजी की ह्त्या और उनकी देसभक्ति इन दोनों बातों को अलग अलग सोचना चाहिए ऐसा मुझे लगता है। मै महात्मा गांधी ह्त्या का समर्थ नहीं करता हूँ। लेकिन नाथूरामजी के देशभक्ती के उपर आक्षेप लेना ये भी सही नहीं मानता हूँ।


